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सिकंदराराऊ का बस अड्डा 20 साल बीतने के बाद भी फाइलों में ही झूल रहा है। इस दौरान कई विधायक बदल गए।

हाथरस:सिकंदराराऊ का बस अड्डा 20 साल बीतने के बाद भी फाइलों में ही झूल रहा है। इस दौरान कई विधायक बदल गए। नेताओं ने बस अड्डा बनवाने का वादा करके सिकंदराराऊ की जनता को सपने खूब दिखाए मगर आज तक साकार नहीं करा सके। अब दावा किया जा रहा है कि क्षेत्रीय विधायक बीरेंद्र सिंह राणा बस अड्डे के लिए प्रयासरत हैं। कई बार मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं और डीएम के जरिए पत्राचार भी कराया है। 20 अक्टूबर को निवर्तमान डीएम ने प्रमुख सचिव से पत्राचार किया है, मगर सिकंदराराऊ के लोगों का दर्द ये है कि कस्बे से तीन किलोमीटर दूर बस अड्डे का निर्माण उपयुक्त रहेगा?20 वर्ष पहले तक रोडवेज बसों का संचालन नगर पालिका गेट के सामने एक प्राइवेट जगह से होता था। बाद में वह जगह रोडवेज से खाली करा ली गई। तब से चार-चार बार जनप्रतिनिधि बदल गए, मगर सिकंदराराऊ तहसील मुख्यालय जैसी जगह पर एक स्थाई रोडवेज बस अड्डे का सपना साकार नहीं करा पाए।जनता 20 साल से रोडवेज बस में सफर करने को भटक रही है। अब तक हाईवे बनने के बाद बसें भी बाइपास होकर निकल जाती हैं। कासगंज और हाथरस से आने वाली बसें पंत चौराहे से होकर निकलती हैं, जिनके यहां ठहराव होने से दिनभर जाम की स्थिति बनीसिकंदराराऊ से तीन किलोमीटर दूर रतनपुर में जगह चिह्नित, डीएम ने लिखा पत्रविधायकों के प्रयास भी लोगों के सपने को साकार करने में रहे हैं अभी नाकामसिकंदराराऊ में 20 साल पहले यहां था वस अड्‌डा जहां हो गया अतिक्रमण जागरण रहती है।शासन ने सिकंदराराऊ में रोडवेजबस स्टैंड के लिए जमीन तलाशने के निर्देश दिए तो कस्बे की उम्मीदें जाग गईं। तहसील के लेखपालों की टीम ने संभावित स्थानों पर जाकर जमीन की पैमाइश की। एक बार फिर ऐसा लगने लगा है कि बस स्टैंड अंजाम तक पहुंच जाएगा। पूर्व में भी कई बार जमीन से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं, लेकिन हर बार बस स्टैंड का निर्माण अधर में ही लटक जाता रहा है। जिले की प्रमुख तहसील होने के बावजूद सिकंदराराऊ में बस स्टैंड का न होना, हर किसी को कचोटता है। प्रतिदिन सैकड़ों बसें यहां से गुजरती हैं, मगर रोडवेज विभाग के अफसरों ने इस समस्या को कभी गंभीरता से नहीं लिया। 55 हजार की आबादी एवं दो-दो हाईवे पर बसा होने के बावजूद जनता बस स्टैंड के लिए तरस रही है।चुनाव के वक्त बस अड्डे कीरोडवेज बस अड्डे को लेकर शासन से एक बार फिर पत्राचार किया जाएगा। हालांकि कुछ दिन पहले की पत्राचार हो चुका है। गंभीर समस्याओं का समाधान किया जाएगा।अतुल वत्स, डीएम हाथरस।बात जरूर सामने आती है, लेकिन चुनाव बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। पिछले एक दशक में कई बार बस स्टैंड के लिए जमीन तलाशी गई, लेकिन योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी। बता दें कि सपा शासनकाल में तहसील के पास सैन्य पड़ाव की जमीन पर बस स्टैंड का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था मगर मामला बीच में ही थम गया।अब रतनपुर में जमीन को चिह्नित किया गया है और उसे लेकर निवर्तमान डीएम राहुल पांडेय ने प्रमुख सचिव को पत्र भी लिखा है। पत्र में सिकंदराराऊ के विधायक बीरेंद्र सिंह राणा की ओर से पत्राचार करने का भी उल्लेख है।हाथरस:

 

सिकंदराराऊ का बस अड्डा 20 साल बीतने के बाद भी फाइलों में ही झूल रहा है। इस दौरान कई विधायक बदल गए। नेताओं ने बस अड्डा बनवाने का वादा करके सिकंदराराऊ की जनता को सपने खूब दिखाए मगर आज तक साकार नहीं करा सके। अब दावा किया जा रहा है कि क्षेत्रीय विधायक बीरेंद्र सिंह राणा बस अड्डे के लिए प्रयासरत हैं। कई बार मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं और डीएम के जरिए पत्राचार भी कराया है। 20 अक्टूबर को निवर्तमान डीएम ने प्रमुख सचिव से पत्राचार किया है, मगर सिकंदराराऊ के लोगों का दर्द ये है कि कस्बे से तीन किलोमीटर दूर बस अड्डे का निर्माण उपयुक्त रहेगा?

 

20 वर्ष पहले तक रोडवेज बसों का संचालन नगर पालिका गेट के सामने एक प्राइवेट जगह से होता था। बाद में वह जगह रोडवेज से खाली करा ली गई। तब से चार-चार बार जनप्रतिनिधि बदल गए, मगर सिकंदराराऊ तहसील मुख्यालय जैसी जगह पर एक स्थाई रोडवेज बस अड्डे का सपना साकार नहीं करा पाए।

 

जनता 20 साल से रोडवेज बस में सफर करने को भटक रही है। अब तक हाईवे बनने के बाद बसें भी बाइपास होकर निकल जाती हैं। कासगंज और हाथरस से आने वाली बसें पंत चौराहे से होकर निकलती हैं, जिनके यहां ठहराव होने से दिनभर जाम की स्थिति बनी

 

सिकंदराराऊ से तीन किलोमीटर दूर रतनपुर में जगह चिह्नित, डीएम ने लिखा पत्र

 

विधायकों के प्रयास भी लोगों के सपने को साकार करने में रहे हैं अभी नाकाम

 

सिकंदराराऊ में 20 साल पहले यहां था वस अड्‌डा जहां हो गया अतिक्रमण जागरण रहती है।

 

शासन ने सिकंदराराऊ में रोडवेज

 

बस स्टैंड के लिए जमीन तलाशने के निर्देश दिए तो कस्बे की उम्मीदें जाग गईं। तहसील के लेखपालों की टीम ने संभावित स्थानों पर जाकर जमीन की पैमाइश की। एक बार फिर ऐसा लगने लगा है कि बस स्टैंड अंजाम तक पहुंच जाएगा। पूर्व में भी कई बार जमीन से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं, लेकिन हर बार बस स्टैंड का निर्माण अधर में ही लटक जाता रहा है। जिले की प्रमुख तहसील होने के बावजूद सिकंदराराऊ में बस स्टैंड का न होना, हर किसी को कचोटता है। प्रतिदिन सैकड़ों बसें यहां से गुजरती हैं, मगर रोडवेज विभाग के अफसरों ने इस समस्या को कभी गंभीरता से नहीं लिया। 55 हजार की आबादी एवं दो-दो हाईवे पर बसा होने के बावजूद जनता बस स्टैंड के लिए तरस रही है।

 

चुनाव के वक्त बस अड्डे की

 

रोडवेज बस अड्डे को लेकर शासन से एक बार फिर पत्राचार किया जाएगा। हालांकि कुछ दिन पहले की पत्राचार हो चुका है। गंभीर समस्याओं का समाधान किया जाएगा।

 

अतुल वत्स, डीएम हाथरस।

 

बात जरूर सामने आती है, लेकिन चुनाव बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। पिछले एक दशक में कई बार बस स्टैंड के लिए जमीन तलाशी गई, लेकिन योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी। बता दें कि सपा शासनकाल में तहसील के पास सैन्य पड़ाव की जमीन पर बस स्टैंड का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था मगर मामला बीच में ही थम गया।

 

अब रतनपुर में जमीन को चिह्नित किया गया है और उसे लेकर निवर्तमान डीएम राहुल पांडेय ने प्रमुख सचिव को पत्र भी लिखा है। पत्र में सिकंदराराऊ के विधायक बीरेंद्र सिंह राणा की ओर से पत्राचार करने का भी उल्लेख है।

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